A poem
Bhumika Shaw
BA Sem 3
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जब-जब तन्हाई ने मुझको गले लगाया,
तेरा साथ ननभाना याद आया।
जब-जब मेरी आँखों ने आँसूसजाए,
तेरा मुस्कुराकर मुझे मनाना याद आया।
जब-जब राहें वीरान सी लगीीं,
तेरा हाथ थामे रहना याद आया।
जब-जब ददल ने अपना अके लापन कहा,
तेरा मेरी खामोशी को पढ़ लेना याद आया।
जब-जब होंठों पर हँसी सजी,
तेरी आँखों का चमककर मुझे देखना याद आया।
जब-जब थकान ने मन को तोडा,
तेरा माथे को सहलाना याद आया।
जब-जब नीींद ने पलकों को चूमा,
तेरे कीं धे पर ससर रखकर सो जाना याद आया।
जब-जब ज ींदगी ने बोझझल सफ़र ददया,
तेरे बबना अधरूा होना याद आया।
आज भी तूयाद है...
हर साँस में, हर एहसास में,
तूमेरी दआु ओीं में, मेरी प्यास में।
आज भी तूयाद है।


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