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हर लम्हे में तू

A poem

Bhumika Shaw

BA Sem 3

Pexels


जब-जब तन्हाई ने मुझको गले लगाया,

तेरा साथ ननभाना याद आया।

जब-जब मेरी आँखों ने आँसूसजाए,

तेरा मुस्कुराकर मुझे मनाना याद आया।


जब-जब राहें वीरान सी लगीीं,

तेरा हाथ थामे रहना याद आया।

जब-जब ददल ने अपना अके लापन कहा,

तेरा मेरी खामोशी को पढ़ लेना याद आया।


जब-जब होंठों पर हँसी सजी,

तेरी आँखों का चमककर मुझे देखना याद आया।

जब-जब थकान ने मन को तोडा,

तेरा माथे को सहलाना याद आया।


जब-जब नीींद ने पलकों को चूमा,

तेरे कीं धे पर ससर रखकर सो जाना याद आया।

जब-जब ज ींदगी ने बोझझल सफ़र ददया,


तेरे बबना अधरूा होना याद आया।


आज भी तूयाद है...

हर साँस में, हर एहसास में,

तूमेरी दआु ओीं में, मेरी प्यास में।

आज भी तूयाद है।

अब मैं तुम्हे कैसे बताऊं?

            A Hindi Poem 

        by

           Tanisha Kabra 

        B.A Sem I

Pic: Pexels 


अब तुम्हे कैसे बताऊं, मेरे लिए क्या हो तुम, 

 सुबह की पहेली सूरज की किरण हो तुम,

 मेरी जिंदगी में चाय में एक्स्ट्रा चीनी वाली मिठास हो तुम,

 खिलते गुलाब की ख़ुशबू हो तुम...

 

अब तुम्हे कैसे बताऊं, मेरे लिए क्या हो तुम,

 मेरी इन आँखों का सुकून और दिल का चैन हो तुम 

अँधेरे आसमान में पूनम का चाँद हो तुम,

 मेरे पूरे दिन खुश रहने की एक इकलौती वजह हो तुम, 

अब मैं तुम्हे कैसे बताऊं?

  मेरे लिए क्या हो तुम...


Edited by: MDD 

काश !

A Hindi poem 

Bhumika  Shaw

B.A Sem 2  


by Pexels

काश! ये जिंदगी ऐसी होती, 

कुछ कुछ मन के जैसी होती । 

हम कहते तो रुकती, हम कहते तो चलती, 

हम जैसा चाहते ये वैसी होती । 

 

वक़्त की चाबी अपने हाथ होती । 

समय अपने अनुकूल दिन होता, 

खुशियों को बाँध के रख पाते, 

हर बंधन से वह आज़ाद होती । 

 

न मिल कर कोई बिछड़ता । 

ना बचपन का वो वक्त निकलता । 

न जुदा होने की रस्में होती, 

ना रिश्तों में बसा प्यार बदलता । 

 

काश! ये जिंदगी ऐसी होती । 

परियों की कहानियों के जैसी होती । 

न कोई शर्तें, न कोई सरहद बाँधती, 

हम जैसी चाहते ये वैसी होती ।