A Hindi poem
Bhumika Shaw
B.A Sem 2
by Pexels
काश! ये जिंदगी ऐसी होती,
कुछ कुछ मन के जैसी होती ।
हम कहते तो रुकती, हम कहते तो चलती,
हम जैसा चाहते ये वैसी होती ।
वक़्त की चाबी अपने हाथ होती ।
समय अपने अनुकूल दिन होता,
खुशियों को बाँध के रख पाते,
हर बंधन से वह आज़ाद होती ।
न मिल कर कोई बिछड़ता ।
ना बचपन का वो वक्त निकलता ।
न जुदा होने की रस्में होती,
ना रिश्तों में बसा प्यार बदलता ।
काश! ये जिंदगी ऐसी होती ।
परियों की कहानियों के जैसी होती ।
न कोई शर्तें, न कोई सरहद बाँधती,
हम जैसी चाहते ये वैसी होती ।

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